मंगलवार, 21 दिसंबर 2010

मेरी पसंद....


बसन्त
और बसन्त फिर आ रहा है
शाकुन्तल का एक पन्ना
मेरी अलमारी से निकलकर
हवा में फरफरा रहा है
फरफरा रहा है कि मैं उठूँ
और आस-पास फैली हुई चीज़ों के कानों में
कह दूँ 'ना'
एक दृढ़
और छोटी-सी 'ना'
जो सारी आवाज़ों के विरुद्ध
मेरी छाती में सुरक्षित है

मैं उठता हूँ
दरवाज़े तक जाता हूँ
शहर को देखता हूँ
हिलाता हूँ हाथ
और ज़ोर से चिल्लाता हूँ –
ना...ना...ना
मैं हैरान हूँ
मैंने कितने बरस गँवा दिये
पटरी से चलते हुए
और दुनिया से कहते हुए
हाँ हाँ हाँ...
केदारनाथ सिंह

24 टिप्‍पणियां:

  1. वाह ! आपकी पसंद तो हमेशा ही बेहतरीन होती है . बहुत बहुत धन्यवाद केदारनाथ जी की की इस रचना को प्रस्तुत करने के लिए ...
    मखमल की चुभन

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  2. बहुत बढ़िया पसंद है, मेरी भी कुछ ऐसी ही पसंद है.

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  3. पता नहीं कितने बरस निकल गये हा हा, ही ही में।

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  4. केदारनाथ जी की यह कविता पढने का अवसर देने के लिए हार्दिक धन्यवाद.

    सादर

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  5. आपकी पसंद तो बस लाजबाब है....
    कभी ना कभी एक बार सबके मन में ये भाव आते ही हैं.

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  6. बहुत अच्छी रचना प्रस्तुत की है वंदना जी...
    आपकी पसंद लाजवाब है, बधाई.

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  7. आपने केदारनाथ सिंह की बहुत सुन्दर रचना को लगाया है!
    आभार इसे पढ़वाने के लिए!

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  8. तुम और तुम्हारी पसंद दोनों का जवाब नहीं

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  9. शाकुन्‍तलम का अभिज्ञान.

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  10. क्रिसमस की शांति उल्लास और मेलप्रेम के
    आशीषमय उजास से
    आलोकित हो जीवन की हर दिशा
    क्रिसमस के आनंद से सुवासित हो
    जीवन का हर पथ.

    आपको सपरिवार क्रिसमस की ढेरों शुभ कामनाएं

    सादर
    डोरोथी

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  11. वंदना जी,
    केदार नाथ जी की कविता पढ़वाने के लिए आभार !
    नव वर्ष की अग्रिम बधाई स्वीकार करें !
    -ज्ञानचंद मर्मज्ञ

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  12. केदारनाथ सिंह की रचना को पढ़वाने के लिए आभार.

    अनगिन आशीषों के आलोकवृ्त में
    तय हो सफ़र इस नए बरस का
    प्रभु के अनुग्रह के परिमल से
    सुवासित हो हर पल जीवन का
    मंगलमय कल्याणकारी नव वर्ष
    करे आशीष वृ्ष्टि सुख समृद्धि
    शांति उल्लास की
    आप पर और आपके प्रियजनो पर.

    आप को सपरिवार नव वर्ष २०११ की ढेरों शुभकामनाएं.
    सादर,
    डोरोथी.

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  13. साहित्य की उत्कृष्ट रचना से
    साक्षात्कार करवाने पर आभार स्वीकारें
    इस्मत जी की टिप्पणी अनुमोदन मांगती है ... !!

    नव वर्ष 2011 की मंगल कामनाएं .

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  14. नववर्ष की मंगल कामनाएं स्वीकार करें । आपको सपरिवार मंगल कामनाएं अर्पण करता हूँ ,स्वीकार हों । - आशुतोष मिश्र

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  15. वाह सुन्दर कविता केदारनाथ जी की..
    प्रस्तुति के लिए धन्यवाद..

    आभार

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  16. आपके द्वारा प्रस्तुत केदारनाथ जी की कविता सामयिक रही.नव-वर्ष २०११ आपको तथा आपके समस्त परिवार के लिए उज्वल,सुन्दर और सुखद भविष्य -प्रदाता हो ऐसी हमारी कामना है.

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  17. बहुत अच्छी रचना प्रस्तुत की है|धन्यवाद|

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  18. वंदना जी, केदारनाथ सिंह जी की इस ऐतिहासिक रचना को हम तक पहुंचाने का शुक्रिया।

    ---------
    पति को वश में करने का उपाय।

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