सोमवार, 8 मार्च 2010

मेरी पसंद....

एक गुडिया की कई कठपुतलियों में जान है,


आज शायर ये तमाशा देख कर हैरान है.



ख़ास सड़कें बंद हैं तब से मरम्मत के लिए,


यह हमारे वक्त की सबसे सही पहचान है.



एक बूढा आदमी है मुल्क में या यों कहो,


इस अँधेरी कोठारी में एक रौशनदान है.



मस्लहत-आमेज़ होते हैं सियासत के कदम,


तू न समझेगा सियासत, तू अभी नादान है.



इस कदर पाबंदी-ए-मज़हब की सदके आपके,


जब से आज़ादी मिली है, मुल्क में रमजान है.



कल नुमाइश में मिला वो चीथड़े पहने हुए,


मैंने पूछा नाम तो बोला की हिदुस्तान है.



मुझमें रहते हैं करोड़ों लोग चुप कैसे रहूँ,


हर ग़ज़ल अब सल्तनत के नाम एक बयान है.



दुष्यंत कुमार


अंतर्राष्ट्रीय महिला वर्ष पर शुभकामनाएं.

20 टिप्‍पणियां:

  1. जरुरी सन्देश दिया आपने.
    .
    .
    .
    ऐसे मनाये महिला दिवस

    सर्वसाधारण के हित में >> http://sukritisoft.in/sulabh/mahila-diwas-message-for-all-from-lata-haya.html

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  2. महिला दिवस पर सभी को हार्दिक शुभकामनाएं...

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  3. कल नुमाइश में मिला वो चीथड़े पहने हुए,


    मैंने पूछा नाम तो बोला की हिदुस्तान है.



    nice

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  4. सशक्त अभिव्यक्ति!

    नारी-दिवस पर मातृ-शक्ति को नमन!

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  5. दुष्यंत कुमार की ग़ज़लें अमर हैं....
    और हर दौर में प्रासांगिक हैं....
    ये खूबसूरत ग़ज़ल एक बार फिर पढ़ी, और बिल्कुल वही अनुभूति हुई, जो पहली बार पढ़कर हुई थी.

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  6. दुष्यंत कुमार को पढ़ना अपने आप में एक सुखद अनुभव है ,बहुत सुन्दर ! वाह!
    कल नुमाइश................
    बहुत सुन्दर शेर है ,इस रचना को पढ़वाने के लिए धन्यवाद

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  7. वाह वन्दना जी दुष्य़ंत जी का इस तरह स्मरण दिलाने के लिये धन्यवाद ।

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  8. दुष्यंत जी की यह कविता प्रस्तुत करने का बहुत आभार ...
    आपको भी बहुत शुभकामनायें ...!!

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  9. कल नुमाइश में मिला वो चीथड़े पहने हुए,
    मैंने पूछा नाम तो बोला की हिदुस्तान है.


    -दुष्यंत जी के क्या कहने..लाजबाब..आपका आभार प्रस्तुति के लिए.

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  10. कल नुमाइश में मिला वो चीथड़े पहने हुए,
    मैंने पूछा नाम तो बोला की हिदुस्तान है.

    bahut khoob..
    lajwaab..
    in panktiyon ki kya baat hai...
    haan nahi to ...!

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  11. लाजवाब,अच्छी अभिव्यक्ति .

    विकास पाण्डेय
    www.विचारो का दर्पण.blogspot.com

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  12. मुझमें रहते हैं करोड़ों लोग चुप कैसे रहूँ,
    हर ग़ज़ल अब सल्तनत के नाम एक बयान है.

    यही दर्द कालजयी रचनायें बनाता है ।

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  13. कल नुमाइश में मिला वो चीथड़े पहने हुए,
    मैंने पूछा नाम तो बोला की हिदुस्तान है.
    bahut hi laazwaab ,jiski rachna hai uske liye kuchh kahne ki jaroot nahi .

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  14. कल नुमाइश में मिला वो चीथड़े पहने हुए,
    मैंने पूछा नाम तो बोला की हिदुस्तान है.


    गजब की पंक्तिया रच डाली है आपने । सुन्दर

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